शादी में देरी और उपाय: वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से
वैदिक ज्योतिष और लाल किताब शादी के सही समय और इसके विलंब के कारणों पर गहराई से प्रकाश डालती है। शुक्र और गुरु शादी के प्रमुख कारक माने जाते हैं, और इनकी स्थिति व ट्रांजिट विवाह के समय का निर्धारण करती है। लाल किताब के अनुसार, शुक्र के पीरियड में शादी का होना बेहद शुभ और स्थिर होता है, खासकर जब यह 25वें से 27वें वर्ष के बीच होती है। वहीं, मंगल के समय में (28-33 वर्ष) शादी होनी चाहिए, वरना यह समय निकलने पर देरी और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
---Marriage Delay के कारण
ज्योतिषीय दृष्टि से शादी में देरी के निम्नलिखित प्रमुख कारण हो सकते हैं:
1. **जन्म तारीख में Missing Numbers:** - यदि जन्म तारीख (Date, Month, Year) में **2, 6, या 7** तीनों नंबर कहीं भी मौजूद नहीं हैं या इनका Total भी **6** नहीं बनता, तो शादी में देरी या समस्याएं हो सकती हैं। -समाधान और उपाय
अगर शादी में विलंब हो रहा है, तो निम्नलिखित ज्योतिषीय उपायों को आजमाएं:
1. **राधा-कृष्ण का जाप:** - प्रतिदिन 108 बार "राधा कृष्ण राधा कृष्ण" का जाप करें।गुरु और शुक्र का ट्रांजिट और शादी के योग
शादी के समय का अनुमान गुरु और शुक्र के गोचर से भी लगाया जा सकता है।
1. **शुक्र के भाव से गुरु का गोचर:** - जब गुरु शुक्र के भाव से गुजरता है, वह साल शादी के लिए अनुकूल होता है।इन सभी ज्योतिषीय संकेतों और उपायों का पालन करके आप अपनी शादी के समय और उसके शुभ योग के बारे में स्पष्टता प्राप्त कर सकते हैं।
---FAQs: शादी और ज्योतिष
**Q1: शादी में देरी क्यों हो रही है?** शुक्र और गुरु की कमजोर स्थिति, 7वें भाव पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव, या कुंडली में मंगल दोष इसके कारण हो सकते हैं। **निष्कर्ष
शादी के सही समय का पता लगाना ज्योतिषीय गणनाओं और कुंडली के विश्लेषण से संभव है। शुक्र और गुरु की स्थिति, दशा और गोचर के आधार पर शादी के शुभ योग बनते हैं। यदि आप भी शादी में देरी से परेशान हैं, तो ज्योतिषीय उपायों को अपनाएं और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।
